"सनातन धर्म" टिप्पणी पर उच्चतम न्यायालय का निर्णय: उदयनिधि को राहत, याचिकाओं पर विचार करने से इनकार

हाल ही में "सनातन धर्म" पर की गई विवादास्पद टिप्पणी के मामले में उच्चतम न्यायालय ने एक अहम फैसला सुनाया है. न्यायालय ने तमिलनाडु सरकार के मंत्री उदयनिधि स्टालिन द्वारा दी गई उस टिप्पणी को लेकर उठाई गई याचिकाओं पर विचार करने से इनकार कर दिया. यह टिप्पणी सनातन धर्म के खिलाफ मानी गई थी, जिसके बाद कई संगठनों और व्यक्तियों ने इसे लेकर न्यायालय में याचिका दायर की थी. 

Date Updated Last Updated : 27 January 2025, 08:42 PM IST
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Courtesy: social media

हाल ही में "सनातन धर्म" पर की गई विवादास्पद टिप्पणी के मामले में उच्चतम न्यायालय ने एक अहम फैसला सुनाया है. न्यायालय ने तमिलनाडु सरकार के मंत्री उदयनिधि स्टालिन द्वारा दी गई उस टिप्पणी को लेकर उठाई गई याचिकाओं पर विचार करने से इनकार कर दिया. यह टिप्पणी सनातन धर्म के खिलाफ मानी गई थी, जिसके बाद कई संगठनों और व्यक्तियों ने इसे लेकर न्यायालय में याचिका दायर की थी. 

उदयनिधि स्टालिन को मिली राहत

उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे इस मुद्दे को अन्य कानूनी तरीकों से हल करने का प्रयास करें, क्योंकि न्यायालय को इसमें हस्तक्षेप करने की कोई आवश्यकता नहीं महसूस हुई. इससे मंत्री उदयनिधि स्टालिन को एक प्रकार की राहत मिली है, और उनके खिलाफ किसी प्रकार की तत्काल कार्रवाई पर फिलहाल रोक लग गई है. 

इस फैसले के बाद, यह स्पष्ट हो गया है कि उच्चतम न्यायालय ने धार्मिक टिप्पणी के मामले में किसी प्रकार की अविलंब कानूनी कार्रवाई की संभावना को नकारा किया है. न्यायालय ने यह भी कहा कि वह इस मामले में किसी प्रकार की सजा या दंड देने से पहले सभी तथ्यों और दृष्टिकोणों को सही ढंग से जांचे बिना निर्णय नहीं ले सकता.

विवाद की जड़ में "सनातन धर्म" पर टिप्पणी

उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणी ने भारत में व्यापक विवाद उत्पन्न कर दिया था. उन्होंने सनातन धर्म को विभाजनकारी और समाज में असमानता को बढ़ावा देने वाला बताया था, जिसके बाद कई धार्मिक समूहों और नेताओं ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी. इसके परिणामस्वरूप कई याचिकाएं उच्चतम न्यायालय में दायर की गईं, जिनमें यह मांग की गई थी कि मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की जाए.

न्यायालय के दृष्टिकोण का महत्व

उच्चतम न्यायालय का यह फैसला भारतीय संविधान के तहत व्यक्तिशः स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकार के महत्व को दर्शाता है. अदालत ने यह स्पष्ट किया कि किसी भी धार्मिक बयानबाजी पर विचार करते समय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक सहिष्णुता को संतुलित तरीके से देखना जरूरी है. 

"सनातन धर्म" पर दी गई टिप्पणी को लेकर उच्चतम न्यायालय का यह निर्णय एक महत्वपूर्ण मोड़ है. अदालत ने इस मामले में तत्काल कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता को नकारते हुए मामले को अन्य कानूनी पहलुओं पर छोड़ दिया है. अब यह देखना होगा कि इस मुद्दे को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या अन्य कानूनी रास्ते इस विवाद को सुलझाने में मदद करते हैं.

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