पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बिहार के साथ अपने 'गहरे जुड़ाव' को याद किया

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मोतिहारी, जो बिहार के पूर्वी चंपारण जिले का मुख्यालय है, में आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए पहुंचे थे. यह कार्यक्रम स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा आयोजित किया गया था. 

Date Updated Last Updated : 09 February 2025, 10:23 PM IST
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Courtesy: social media

Motihari (Bihar): भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को बिहार राज्य के साथ अपने गहरे जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि उनका विश्वास है कि उन्होंने जो कुछ भी जीवन में हासिल किया है, वह बिहार के लोगों के आशीर्वाद के कारण संभव हुआ है. पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मोतिहारी, जो बिहार के पूर्वी चंपारण जिले का मुख्यालय है, में आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए पहुंचे थे. यह कार्यक्रम स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा आयोजित किया गया था. 

बिहारी राष्ट्रपति के रूप में पहचान

कोविंद ने इस मौके पर अपने राष्ट्रपति पद के कार्यकाल के दौरान बिहार के प्रति अपने गहरे जुड़ाव का जिक्र करते हुए कहा, "मेरे कार्यकाल के दौरान मुझे अक्सर 'बिहारी राष्ट्रपति' कहा जाता था. मुझे यह बेहद पसंद था, क्योंकि मैंने हमेशा राज्य के प्रति गहरी भावना और लगाव महसूस किया है." 

उन्होंने कहा कि बिहार ने उन्हें हमेशा स्नेह और समर्थन दिया, और यही कारण है कि वे अपने राष्ट्रपति कार्यकाल में भी राज्य के लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदारी और प्रेम महसूस करते थे. 

बिहार का योगदान और आशीर्वाद

कोविंद ने बिहार को अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हुए इसे एक प्रेरणा स्रोत बताया. उन्होंने बिहार की संस्कृति, इतिहास और यहां के लोगों के योगदान की सराहना की. उन्होंने यह भी कहा कि राज्य ने उन्हें हमेशा मार्गदर्शन और प्रेरणा दी, और यह राज्य उनके दिल के करीब हमेशा रहेगा.

राज्य के विकास में योगदान

रामनाथ कोविंद ने बिहार के विकास की दिशा में सरकार और राज्य के लोगों द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की. उन्होंने कहा कि बिहार में लगातार बदलाव और विकास हो रहे हैं, और यह राज्य एक नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनका मानना था कि बिहार को भविष्य में और भी अधिक सफलता प्राप्त होगी.

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का बिहार के साथ गहरा जुड़ाव और उनकी व्यक्तिगत यात्रा ने यह साबित कर दिया कि उनका दिल हमेशा इस राज्य के लिए समर्पित रहा है. बिहार के लोगों के साथ उनका संबंध न केवल भावनात्मक था, बल्कि उन्होंने हमेशा राज्य के विकास और कल्याण के लिए अपने प्रयास किए. उनके शब्दों से यह स्पष्ट है कि बिहार उनके लिए सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि एक परिवार जैसा था.

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