मणिपुर में AFSPA की बढ़ाई गई अवधि, 13 पुलिस थाना क्षेत्रों को छोड़कर पूरे राज्य में लागू

मणिपुर में सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (AFSPA) को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. गृह मंत्रालय (MHA) ने रविवार को घोषणा की कि 13 थाना क्षेत्रों को छोड़कर पूरे मणिपुर राज्य में AFSPA लागू रहेगा.

Date Updated Last Updated : 30 March 2025, 04:38 PM IST
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Manipur AFSPA extension: मणिपुर में सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (AFSPA) को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. गृह मंत्रालय (MHA) ने रविवार को घोषणा की कि 13 थाना क्षेत्रों को छोड़कर पूरे मणिपुर राज्य में AFSPA लागू रहेगा. इसके साथ ही अरुणाचल प्रदेश के तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग जिलों और तीन थाना क्षेत्रों में भी इस कानून को अगले छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया है. राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है.

AFSPA का इतिहास 

मणिपुर में हाल के दिनों में राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिली है. 13 फरवरी की शाम को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया और विधानसभा को निलंबित कर दिया गया. यह फैसला मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद आया, जिन्होंने 2017 से भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार का नेतृत्व किया था.

मई 2023 से चल रही जातीय हिंसा में अब तक 250 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जिसके बाद सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. मणिपुर में 1980 के दशक से AFSPA लागू है. यह कानून सुरक्षा बलों को अशांत क्षेत्रों में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष अधिकार देता है. हालांकि, इसके तहत उपलब्ध व्यापक शक्तियों के कारण यह हमेशा विवादों में रहा है.

सुरक्षा बलों की कार्रवाई

सुरक्षा बलों ने शनिवार को मणिपुर के पहाड़ी और घाटी जिलों के संवेदनशील इलाकों में तलाशी अभियान चलाया. इस दौरान चुराचांदपुर जिले के थांगजिंग पहाड़ी जंगल से कई हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए. इंफाल पुलिस के बयान में कहा गया है कि ऑपरेशन के दौरान एक देसी राइफल, एक बोल्ट एक्शन राइफल, एक 22 पिस्तौल, एक देसी मोर्टार (पोम्पी-6 फीट), एक देशी हैंड ग्रेनेड, एक हेलमेट, एक वायरलेस सेट, एक एचई बम, 5.56 मिमी के दस जिंदा राउंड, 7.62x39 मिमी के बारह खाली गोले और 500 ग्राम गन पाउडर बरामद किया गया. मणिपुर में अफस्पा के विस्तार और सुरक्षा बलों की सक्रियता ने राज्य में शांति बहाल करने के प्रयास तेज कर दिए हैं. हालांकि, इस कानून के असर और जनता पर इसके असर को लेकर बहस चल रही है.

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