यति नरसिंहानंद सरस्वती का विवादित बयान, 'एक बच्चे को जन्म देने वाली माँ की तुलना नागिन से की'

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित डासना देवी मंदिर के प्रमुख महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती एक बार फिर अपने उत्तेजक और विवादित बयानों के कारण चर्चा का केंद्र बन गए हैं. विवादों से उनका पुराना नाता रहा है, लेकिन इस बार उन्होंने मां-बेटे के पवित्र रिश्ते पर ऐसी टिप्पणी की है, जो समाज में गूंज पैदा कर रही है.

Date Updated Last Updated : 12 September 2025, 01:25 PM IST
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Yeti Narasimhanand Saraswati: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित डासना देवी मंदिर के प्रमुख महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती एक बार फिर अपने उत्तेजक और विवादित बयानों के कारण चर्चा का केंद्र बन गए हैं. विवादों से उनका पुराना नाता रहा है, लेकिन इस बार उन्होंने मां-बेटे के पवित्र रिश्ते पर ऐसी टिप्पणी की है, जो समाज में गूंज पैदा कर रही है.

मुजफ्फरनगर के गांधी नगर कॉलोनी में स्थित श्यामा-श्याम मंदिर में आयोजित पांच दिवसीय मां बगलामुखी महायज्ञ के दूसरे दिन उन्होंने यह बयान दिया. यह यज्ञ धर्म की रक्षा, परिवार की मजबूती और बेटियों के सम्मान के उद्देश्य से किया जा रहा है, लेकिन महंत के शब्दों ने इसे नया मोड़ दे दिया.

'एक बच्चे वाली मां खतरा'

महायज्ञ के दौरान यति नरसिंहानंद ने हिंदू परिवारों की घटती जनसंख्या पर चिंता जताते हुए महिलाओं को निशाना बनाया. उन्होंने कहा कि जो मां केवल एक बेटे को जन्म देकर रुक जाती है, वह वास्तव में नागिन के समान है, जो अपने ही बच्चे को निगल लेती है.

उनके अनुसार, "जिस परिवार में कोई सगा भाई न हो, उसका अस्तित्व ही संकट में पड़ जाता है. एकल संतान वाली मां अपने बच्चों के भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा साबित होती है." यह बयान वेदों और सनातन परंपराओं के विपरीत बताते हुए उन्होंने हिंदू समाज से अधिक संतानों के उत्पादन का आह्वान किया. विशेषज्ञों का मानना है कि यह टिप्पणी महिलाओं के अधिकारों और परिवार नियोजन नीतियों पर सवाल उठाती है, जिससे सामाजिक बहस तेज हो गई है.

'हमारे पास अपना देश कहने को एक इंच जमीन भी नहीं'

यज्ञ के मंच से यति नरसिंहानंद ने सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए अलग वैदिक राष्ट्र की मांग को जोरदार तरीके से उठाया. उन्होंने कहा, "सनातन धर्म को मानने वालों का अपना एक स्वतंत्र वैदिक राष्ट्र होना चाहिए. हमारे पास अपना देश कहने के लिए एक इंच जमीन भी नहीं है, जबकि अन्य धर्मों के पास अपने-अपने राष्ट्र हैं."

नेपाल में हाल की हिंसा का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे हिंदुओं के दमन का परिणाम बताया. "वहां के नेताओं को जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि हिंदू समाज का उत्पीड़न जारी है." यह बयान राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रियाएं पैदा कर रहा है.

कश्मीर में मुसलमान ज्यादा कट्टर

राहुल गांधी के बिहार में वोट चोरी के आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए यति ने कहा, "नेता तो गली के भौंके कुत्तों की तरह होते हैं, जिनकी बातों को गंभीरता से लेना व्यर्थ है." अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कश्मीर की स्थिति पर उन्होंने सवाल खड़े किए. "मुसलमान पहले से कहीं ज्यादा कट्टर हो गए हैं, और यह उन दावों की पोल खोलता है जो 370 हटाने से शांति आने की बात करते थे."

इन टिप्पणियों ने राजनीतिक दलों के बीच तनाव बढ़ा दिया है.यति नरसिंहानंद सरस्वती के ये बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, और विभिन्न संगठनों ने निंदा की है. महायज्ञ में उनके शिष्य यति अभयानंद और अन्य संत भी मौजूद थे. यह घटना हिंदू समाज की एकजुटता और जनसंख्या नीतियों पर नई बहस छेड़ रही है.

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