यूपी के इस गांव में महिलाओं ने क्यों छोड़ा चूड़ी-सिंदूर? लखनऊ में धर्मांतरण गिरोह का चौंकाने वाला खुलासा

Lucknow Nigohan conversion racket: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के निगोहां इलाके में एक ऐसा षड्यंत्र सामने आया है, जिसने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया. यहां के बक्तौरी खेड़ा, खरगपुर और मेहंदौली जैसे गांवों में महिलाओं ने अचानक अपनी पारंपरिक चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी और मंगलसूत्र पहनना बंद कर दिया था.

Date Updated Last Updated : 29 September 2025, 01:10 PM IST
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Lucknow Nigohan conversion racket: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के निगोहां इलाके में एक ऐसा षड्यंत्र सामने आया है, जिसने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया. यहां के बक्तौरी खेड़ा, खरगपुर और मेहंदौली जैसे गांवों में महिलाओं ने अचानक अपनी पारंपरिक चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी और मंगलसूत्र पहनना बंद कर दिया था.

पुरुषों ने रुद्राक्ष की माला त्यागकर क्रॉस पहनना शुरू कर दिया. घरों और गाड़ियों में भगवान शिव या अन्य देवताओं की तस्वीरें हटाकर यीशु की मूर्तियां सजाई जाने लगीं. लेकिन इसका पीछे का राज क्या था? पुलिस ने एक बड़े धर्मांतरण गिरोह का पर्दाफाश किया, जिसमें प्रार्थना सभाओं और आर्थिक लालच के जरिए सैकड़ों ग्रामीणों का ब्रेनवाश किया जा रहा था. गिरोह के सरगना मलखान उर्फ मैथ्यू और उसके साथी को गिरफ्तार कर लिया गया है. अब ग्रामीण अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं.

महिलाओं के पहनावे पर हुआ शक

यह मामला तब तब्दील हुआ जब उत्तर प्रदेश पुलिस का मिशन शक्ति अभियान जोरों पर था. कुछ दिनों पहले निगोहां थाना क्षेत्र के वक्तौरी खेड़ा, खरगपुर समेत कई गांवों में महिला चौपालें आयोजित की गईं. इन चौपालों में सैकड़ों ग्रामीण महिलाएं पहुंचीं, लेकिन पुलिस को कुछ असामान्य नजर आया.

अधिकांश हिंदू महिलाओं के चेहरों पर सिंदूर या बिंदी का नामोनिशान न था. चूड़ियां, बिछुआ और मंगलसूत्र जैसी पारंपरिक निशानियां गायब थीं. यह देखकर एसीपी मोहनलालगंज रजनीश वर्मा को सतर्कता बरतनी पड़ी. उन्होंने चुपके से जांच शुरू करवाई और ग्राम सुरक्षा समिति के सदस्यों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी.समिति की रिपोर्ट में धर्मांतरण के संकेत मिले. एसीपी वर्मा ने बताया, "चौपाल के दौरान महिलाओं का पहनावा संदिग्ध लगा.

हमने मुखबिरों और सर्विलांस के जरिए निगरानी बढ़ाई. मामला संवेदनशील था, इसलिए पुलिस उपायुक्त निपुण अग्रवाल और उच्चाधिकारियों को हर अपडेट दिया गया." फूंक-फूंक कर कदम उठाने का नतीजा यह हुआ कि गिरोह के सदस्यों को हिरासत में ले लिया गया. सख्त पूछताछ में सारा राज खुल गया. जांच से पता चला कि गिरोह ने पिछले दो वर्षों में 250 से अधिक लोगों को अपने जाल में फंसाया था, खासकर अनुसूचित जाति के कम पढ़े-लिखे और गरीब परिवारों को निशाना बनाया.

ब्रेनवाश के हथकंडे जो तोड़ रहे थे परंपराएं

पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह 'यीशु चंगाई सभा' के नाम पर प्रार्थना सभाएं आयोजित करता था. सरगना मलखान, जो खुद 2016 में ईसाई बन गया और नाम मैथ्यू रख लिया, अपने खेत में बने हॉल में महीने में दो बार ये सभाएं करता. यहां बीमार ग्रामीणों को गठिया, मिर्गी, सांस की बीमारी जैसी परेशानियों से मुक्ति का वादा किया जाता. सभा में क्रॉस को पवित्र जल में डुबोकर पीने का चमत्कार दिखाया जाता, जिससे लोग मोहित हो जाते. लेकिन असल में यह ब्रेनवाश का हथकंडा था.

ग्रामीणों को सिखाया जाता कि मूर्ति पूजा पाप है. घरों से सभी देवी-देवताओं की मूर्तियां हटा दें. शराब का सेवन पूरी तरह बंद कर दें, क्योंकि ईसाई बनने के बाद यह निषिद्ध है. पुरुषों को रुद्राक्ष माला छोड़कर क्रॉस पहनने की सलाह दी जाती, जबकि महिलाओं को सिंदूर-बिंदी लगाना वर्जित ठहराया जाता. इसके अलावा, बपतिस्मा (दीक्षा) के नाम पर धर्मांतरण कराया जाता. मलखान ने अपने परिवार को भी कन्वर्ट कराया और कई अन्य को पास्टर बना दिया. ये सभी दो दर्जन से अधिक गांवों में नेटवर्क फैला चुके थे. सभा में कहा जाता, "यीशु का बलिदान ही सच्चा रास्ता है. मूर्तिपूजा छोड़ो, तभी बीमारियां भागेंगी."

आर्थिक लालच ने बनाया हथियार

गिरोह का सबसे खतरनाक हथियार था सोशल मीडिया. मलखान ने 'यीशु चंगाई सभा' नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाया, जिसमें ग्रामीणों को जोड़ा जाता. रोजाना मैसेज भेजे जाते: "भगवान ने आपको नेक काम के लिए भेजा है. ज्यादा से ज्यादा लोगों को प्रार्थना में लाओ. जितने लोगों को जोड़ोगे, उतनी ही खुशियां बरसेंगी. यीशु ने अपना बलिदान देकर सत्य दिखाया. समाज को मजबूत बनाओ." ये संदेश आध्यात्मिक लगते, लेकिन पीछे छिपा था धर्मांतरण का एजेंडा.

धर्मांतरण के बाद गिरोह आर्थिक मदद का लालच भी देता. बीमारों को दवा, गरीबों को राशि और प्रचार करने वालों को कमीशन मिलता. पुलिस अब फंडिंग के स्रोत की तह तक पहुंच रही है. मलखान और उसके परिवार के बैंक खातों की स्क्रूटनी हो रही. एसीपी वर्मा ने कहा, "ईसाई बनाने के बाद आर्थिक सहायता दी जाती थी. फंडिंग का पता लगाना प्राथमिकता है." जांच में 50 से अधिक कन्वर्ट हुए लोगों की पहचान हो चुकी है.

गिरफ्तारी के बाद लौटी परंपराएं

मलखान की गिरफ्तारी के बाद गांवों में हड़कंप मच गया. ग्रामीणों ने अपनी पुरानी परंपराओं को अपनाना शुरू कर दिया. महिलाएं फिर से सिंदूर, बिंदी और चूड़ियां पहनने लगीं. एक ग्रामीण महिला ने बताया, "हमें बीमारी ठीक होने का लालच दिया गया. प्रार्थना में आओ, तो सब ठीक हो जाएगा. लेकिन यह सब धोखा था. अब हम अपनी संस्कृति में लौट आए हैं." पुरुषों ने क्रॉस उतारकर रुद्राक्ष माला पहन ली. घरों में फिर से देवताओं की तस्वीरें सजाई जा रही हैं.पुलिस ने मामले में सख्ती बरती है.

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