अखिलेश यादव का योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला, ‘झूठ बोलने से गरिमा को ठेस’

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जब समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर झूठ बोलने का गंभीर आरोप लगाया.

Date Updated Last Updated : 19 September 2025, 12:39 PM IST
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Akhilesh Yadav: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जब समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर झूठ बोलने का गंभीर आरोप लगाया. यह विवाद तब शुरू हुआ, जब सीएम योगी ने दावा किया कि उनके सत्ता में आने से पहले यूपी में कहीं भी मेट्रो सेवा नहीं थी. अखिलेश ने इस बयान को पूरी तरह गलत करार देते हुए तीखा पलटवार किया और इसे शर्मनाक बताया.

 अखिलेश ने दिया जवाब

गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था, “जब हम सत्ता में आए, तब उत्तर प्रदेश के किसी भी शहर में मेट्रो का संचालन नहीं हो रहा था. आज छह शहरों में मेट्रो चल रही है.” इस बयान पर पलटवार करते हुए अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा कीं, जिसमें उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान लखनऊ मेट्रो को हरी झंडी दिखाई थी. इन तस्वीरों में वह अपने परिवार के साथ मेट्रो में सफर करते भी नजर आए. अखिलेश ने लिखा, “इतना बड़ा झूठ बोलना शर्मनाक है. इससे न केवल व्यक्ति की गरिमा गिरती है, बल्कि उस पद की मर्यादा को भी ठेस पहुंचती है, जिस पर वह आसीन है.”

‘झूठ से सत्य लज्जित’

सपा अध्यक्ष ने अपनी पोस्ट में योगी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि झूठ बोलने की आदत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं की पहचान बन चुकी है. उन्होंने लिखा, “आज तो झूठ भी लज्जित महसूस कर रहा होगा. सत्ता का लालच ऐसा है कि भाजपा के नेता स्पष्ट साक्ष्यों को भी नकार देते हैं.” अखिलेश ने यह भी आरोप लगाया कि ऐसे बयान देने वाले लोग जनता को मूर्ख समझते हैं, लेकिन जनता सच को समझती है और ऐसे नेताओं की साख को पहचानती है.

पद की गरिमा का सम्मान करें

अखिलेश ने योगी को नसीहत देते हुए कहा कि यदि वह अपनी साख नहीं बचा सकते, तो कम से कम मुख्यमंत्री पद की गरिमा का सम्मान करें. उन्होंने महाकुंभ जैसे पवित्र आयोजन का जिक्र करते हुए योगी पर पहले भी झूठ बोलने का आरोप लगाया. अखिलेश ने लिखा, “जो लोग धार्मिक अवसरों पर भी सत्य को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं, उनसे सच की उम्मीद करना व्यर्थ है.”

यह विवाद उत्तर प्रदेश में सपा और भाजपा के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान का हिस्सा है. अखिलेश का यह बयान न केवल योगी सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले सपा को मजबूत विपक्ष के रूप में स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है.

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