जम्मू-कश्मीर में बादल फटने से 32 लोगों की मौत, उमर अब्दुल्ला ने उठाए सवाल

जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश और बादल फटने की घटना ने भारी तबाही मचाई, जिसमें 32 लोगों की जान चली गई. इस प्राकृतिक आपदा ने क्षेत्र में राहत और बचाव कार्यों को तेज करने की मांग को बढ़ा दिया है.

Date Updated Last Updated : 27 August 2025, 07:16 PM IST
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Jammu and Kashmir: जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश और बादल फटने की घटना ने भारी तबाही मचाई, जिसमें 32 लोगों की जान चली गई. इस प्राकृतिक आपदा ने क्षेत्र में राहत और बचाव कार्यों को तेज करने की मांग को बढ़ा दिया है. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और केंद्र सरकार से सहायता का आश्वासन प्राप्त किया. उन्होंने मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद समय पर कार्रवाई न होने पर गहरी चिंता जताई.

आपदा का भयावह मंजर

जम्मू-कश्मीर के कटरा में वैष्णो देवी धाम के ट्रैक पर भूस्खलन ने 32 लोगों की जान ले ली, जबकि कई अन्य घायल हुए और कुछ लापता हैं. प्रशासन ने बताया कि भारी बारिश के कारण वैष्णो देवी यात्रा को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया है. सांबा, कठुआ, जम्मू, उधमपुर और डोडा जैसे निचले इलाकों में भारी नुकसान हुआ है. नदियों के किनारे बसे घरों को भी खतरा बना हुआ है, जिसके लिए दीर्घकालिक समाधान की जरूरत है.

उमर अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राहत कार्यों को तेज करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा, “मौसम की चेतावनी के बावजूद समय पर कार्रवाई न होना दुखद है. कटरा में 29-30 लोगों की जान गई, क्या हम उन्हें सुरक्षित स्थान पर नहीं ले जा सकते थे?” उन्होंने 2014 की बाढ़ का जिक्र करते हुए कहा कि उसी पुल का हिस्सा फिर से क्षतिग्रस्त हुआ, जो एक गंभीर खतरे का संकेत है.

केंद्र सरकार का सहयोग

उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात कर उन्हें स्थिति से अवगत कराया. बारिश थमने से राहत कार्यों में तेजी आई है, और निचले इलाकों से पानी कम होने लगा है. उमर ने कहा, “हमारी प्राथमिकता लोगों की जान बचाना और उन्हें सहायता पहुंचाना है. बाद में हम चूक की जांच करेंगे.”

राहत और बचाव कार्य

मुख्यमंत्री ने नदियों के किनारे अवैध बस्तियों को हटाने और प्रभावित लोगों के लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था करने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे ताकि भविष्य में इस तरह की त्रासदी से बचा जा सके. राहत टीमें दिन-रात काम कर रही हैं. लापता लोगों की तलाश और घायलों को चिकित्सा सुविधा प्रदान की जा रही है. प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सामग्री वितरण शुरू कर दिया है.

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