इलाहाबाद HC का राहुल गांधी की नागरिकता मामले में फैसला, केंद्र सरकार को दिया निर्णय लेने का निर्देश

कोर्ट ने कहा कि यह मामला दो विदेशी सरकारों के बीच संवाद से जुड़ा है, इसलिए केंद्र को इस पर विचार करना होगा. साथ ही याचिकाकर्ता को सरकार के अंतिम फैसले के बाद दोबारा कोर्ट में अपील करने की छूट दी गई. 

Date Updated Last Updated : 05 May 2025, 05:37 PM IST
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Courtesy: Social Media

Rahul Gandhi Dual Citizenship: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने 5 मई 2025 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की नागरिकता रद्द करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई पूरी की. न्यायमूर्ति एआर मसूदी और न्यायमूर्ति राजीव सिंह की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को इस मामले में अंतिम निर्णय लेने और याचिकाकर्ता को शीघ्र सूचित करने का आदेश दिया.

कोर्ट ने कहा कि यह मामला दो विदेशी सरकारों के बीच संवाद से जुड़ा है, इसलिए केंद्र को इस पर विचार करना होगा. साथ ही याचिकाकर्ता को सरकार के अंतिम फैसले के बाद दोबारा कोर्ट में अपील करने की छूट दी गई. 

यूनाइटेड किंगडम की भी नागरिकता

भाजपा नेता और अधिवक्ता एस विग्नेश शिशिर ने याचिका दायर कर दावा किया था कि राहुल गांधी के पास भारत के अलावा यूनाइटेड किंगडम की भी नागरिकता है. उनका आरोप है कि दोहरी नागरिकता के कारण राहुल गांधी संविधान के अनुच्छेद 84(ए) के तहत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हैं. कोर्ट ने याचिका को लंबित रखने का कोई औचित्य न देखते हुए इसे बंद कर दिया, लेकिन याचिकाकर्ता को वैकल्पिक कानूनी रास्ते अपनाने की स्वतंत्रता दी. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने गृह मंत्रालय की स्थिति रिपोर्ट पर नाराजगी जताई थी, क्योंकि यह स्पष्ट नहीं कर सकी कि राहुल गांधी की नागरिकता की स्थिति क्या है. 

रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय 

कोर्ट ने मंत्रालय को दोहरी नागरिकता के आरोपों पर विस्तृत और संशोधित रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया था. हालांकि केंद्र ने विशिष्ट समयसीमा देने में असमर्थता जताई, जिसके बाद कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया. यह याचिका राहुल गांधी और कांग्रेस के लिए सियासी रूप से संवेदनशील रही है. विग्नेश शिशिर की याचिका ने दोहरी नागरिकता के मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया है. केंद्र सरकार के अंतिम निर्णय के बाद इस मामले में नया मोड़ आ सकता है. यदि याचिकाकर्ता दोबारा कोर्ट का रुख करते हैं, तो यह मामला और चर्चा में रहेगा. फिलहाल कोर्ट का यह फैसला केंद्र पर जवाबदेही तय करता है और कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता खोलता है. 

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