बिहार के बाद अब यूपी में अखिलेश की नई राजनीतिक चाल, महिला वोटरों को साधने की बड़ी रणनीति के संकेत

बिहार चुनाव परिणामों के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में भी हलचल बढ़ गई है. 2027 विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं.

Date Updated Last Updated : 03 December 2025, 02:29 PM IST
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Akhilesh Yadav's strategy: बिहार चुनाव परिणामों के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में भी हलचल बढ़ गई है. 2027 विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं. इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महिलाओं को केंद्र में रखकर अपनी नई रणनीति का संकेत दिया है. सोशल मीडिया पर की गई उनकी हालिया पोस्ट ने साफ कर दिया है कि आगामी चुनाव में “आधी आबादी” सपा की सबसे अहम राजनीतिक पिच होगी.

अखिलेश यादव ने एक्स पर सपा की तीन महिला सांसदों, डिंपल यादव, इकरा हसन और प्रिया सरोज की तस्वीर साझा की. इस पोस्ट के साथ उन्होंने लिखा कि नारी शक्ति का विकास सिर्फ नारेबाजी से नहीं, बल्कि वास्तविक प्रतिनिधित्व देने से होगा. उन्होंने दावा किया कि सपा की पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नीति में ‘A’ का अर्थ आधी आबादी है, और पार्टी महिलाओं की आर्थिक-सामाजिक स्थिति को मजबूत करने को प्राथमिकता देगी.

महिला वोटरों पर सपा का फोकस बढ़ा

अखिलेश ने कहा कि सपा की आगामी “स्त्री सम्मान-समृद्धि योजना” महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर देगी और यूपी की उन्नति में उनकी भूमिका को मजबूत करेगी.

यह बयान ऐसे समय में आया है, जब देशभर में चुनावी रुझान महिलाओं के बढ़ते प्रभाव को दिखा रहे हैं. हाल के बिहार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र चुनावों में महिला मतदाताओं ने रिकॉर्ड संख्या में मतदान किया. जिन राज्यों में महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं लाई गईं, वहां सत्ताधारी दलों को स्पष्ट रूप से इसका फायदा मिला. इसी वजह से राजनीतिक दलों की रणनीति में महिला वोट बैंक सबसे अहम हो गया है.

सपा की रणनीति बदली

सपा ने लंबे समय तक अपने संगठन में महिला नेतृत्व को सीमित दायरे में रखा, लेकिन अब परिस्थिति बदली हुई दिख रही है. संसद में डिंपल यादव, इकरा हसन और प्रिया सरोज की सक्रियता सपा की नई छवि को मजबूत कर रही है. यही कारण है कि अखिलेश यादव ने इन तीनों सांसदों की तस्वीर जारी कर महिला नेतृत्व को आगे लाने का संदेश दिया.

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अखिलेश का यह कदम आगामी चुनावों की दिशा तय कर सकता है. सपा अब स्पष्ट तौर पर उन मतदाताओं पर फोकस कर रही है, जिनकी भूमिका लगातार निर्णायक होती जा रही है.

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