कुलीनतंत्र क्या है और क्या अमेरिका कुलीनतंत्र बनने की ओर अग्रसर है?

अमेरिका के निवर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपने विदाई संबोधन में चेतावनी दी कि “अमेरिका में अत्यधिक धनबल, शक्ति और प्रभाव वाला एक कुलीनतंत्र (ओलिगार्की) आकार ले रहा है जो सचमुच हमारे पूरे लोकतंत्र के लिए खतरा है.’’

Date Updated Last Updated : 20 January 2025, 04:05 PM IST
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Courtesy: social media

अमेरिका के निवर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपने विदाई संबोधन में चेतावनी दी कि “अमेरिका में अत्यधिक धनबल, शक्ति और प्रभाव वाला एक कुलीनतंत्र (ओलिगार्की) आकार ले रहा है जो सचमुच हमारे पूरे लोकतंत्र के लिए खतरा है.’’

इस टिप्पणी से पता चलता है कि राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में सार्वजनिक नीति को आकार देने वाले लोग नहीं बल्कि अरबपति होंगे.

‘ओलिगार्की’ सामाजिक संगठन का वह स्वरूप है जिसमें राजनीतिक शक्ति मुख्य रूप से धनवान अभिजात्य वर्ग के हाथों में होती है.

निश्चित रूप से कुछ ऐसे साक्ष्य हैं जिनके आधार पर बाइडन की चेतावनी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए.

दुनिया के सबसे अमीर आदमी और ‘एक्स’ के मालिक एलन मस्क रिपब्लिकन उम्मीदवार के मुखर समर्थक रहे हैं। वर्ष 2024 के चुनाव में जीत के बाद ट्रंप से मुलाकात करने वाले लोगों में मेटा के मार्क जुकरबर्ग, अमेजन के जेफ बेजोस, एप्पल के टिम कुक और गूगल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुंदर पिचाई शामिल हैं.

क्या इन नए प्रौद्योगिकी दिग्गजों को कुलीन वर्ग माना जाना चाहिए?

कुलीनतंत्र क्या है?

आज भी हम जिन अनेक शैक्षणिक और वैज्ञानिक श्रेणियों का प्रयोग करते हैं, उनमें से कुलीनतंत्र को मूलतः यूनानी दार्शनिक अरस्तु ने परिभाषित किया था.

यदि संविधान भ्रष्ट हो गया और नेतृत्व ने केवल अपने स्वार्थ को आगे बढ़ाने के लिए काम किया तो अरस्तु ने उन्हें अत्याचार, कुलीनतंत्र और लोकतंत्र का नाम दिया.

इसलिए अरस्तु के अनुसार कुलीनतंत्र एक भ्रष्ट शासन व्यवस्था है। यह तब होता है जब सत्ता कुलीन वर्ग के एक छोटे समूह के हाथों में होती है जो लोगों की भलाई के बजाय अपने हितों को आगे बढ़ाते हैं.

अरस्तु के शब्दों में, लोकतंत्र भी सरकार का एक भ्रष्ट रूप है जिसमें बहुमत अपनी शक्ति का इस्तेमाल अल्पसंख्यकों के साथ दुर्व्यवहार करने के लिए करता है.

जब अमेरिका का निर्माण हुआ, तो इसके संस्थापक सदस्यों ने सर्वोत्तम संविधान बनाने के लिए अरस्तु, पॉलीबियस, सिसरो और अन्य प्राचीन विचारकों की ओर देखा.

(इस खबर को सलाम हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की हुई है) 

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