Afghan women: 'पहले चेहरा ढकें और अब मुंह बंद रखें', आखिर महिलाओं के साथ क्या करना चाहता तालिबान?

Afghan women: अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने महिलाओं को लेकर एक नया फरमान जारी किया है, जिससे उनकी स्वतंत्रता को और भी सिमित सीमित किया गया है. उन्हें एक-दूसरे की उपस्थिति में ऊंची आवाज़ में प्रार्थना करने से रोकता है. किसी भी महिला की आवाज सावर्जनिक रूप से नहीं सुननी चाहिए, चाहे वो अन्य महिलाओं द्वारा भी क्यों ना हो.

Date Updated Last Updated : 30 October 2024, 01:06 PM IST
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Afghan women: अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने महिलाओं को लेकर एक नया फरमान जारी किया है, जिससे उनकी स्वतंत्रता को और भी सिमित सीमित किया गया है. उन्हें एक-दूसरे की उपस्थिति में ऊंची आवाज़ में प्रार्थना करने से रोकता है. तालिबान के सदाचार के प्रचार और बुराई की रोकथाम मंत्री मोहम्मद खालिद हनफ़ी द्वारा जारी किए गए इस आदेश में कहा गया है कि महिलाओं को अन्य महिलाओं के आस-पास होने पर कुरान को जोर से पढ़ने से बचना चाहिए. 

अफगान की एक समाचार एजेंसी ने दावा किया कि हनफी ने इस बात का प्रतिबंध इस लिए लगाया क्योंकी एक महिला की अच्छी आवाज को 'अवरा' मन जाता है. लेकिन महिलाओं की इस आवाज को छिपाना चाहिए. किसी भी महिला की आवाज सावर्जनिक रूप से नहीं सुननी चाहिए, चाहे वो अन्य महिलाओं द्वारा भी क्यों ना हो. 

महिलाओं की बोलने की स्वतंत्रता छीनी गई

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि महिलाओं को तकबीर या अज़ान कहने की अनुमति नहीं है, तो वे निश्चित रूप से गायन या संगीत का आनंद नहीं ले सकती हैं. हनाफी ने आगे बताया कि महिला की आवाज़ को 'अवरा' माना जाता है, जिसका मतलब है कि उसे छिपाया जाना चाहिए और सार्वजनिक रूप से नहीं सुना जाना चाहिए, यहाँ तक कि अन्य महिलाओं के बीच भी नहीं सुनना चाहिए. इस नए प्रतिबंध से विशेषज्ञों में चिंता पैदा हो गई है, उन्हें डर है कि इससे महिलाओं की स्वतंत्र रूप से बोलने की क्षमता बाधित हो सकती है, जिससे वे सार्वजनिक जीवन से और भी दूर हो सकती हैं.

यह 2021 में तालिबान की सरकार बनने के बाद महिलाओं के लिए कई आदेश जारी किया गया था. जिसमे कहा गया कि वो सार्वजनिक स्थानों पर अपना चेहरा ढक कर घूंघट सहित पूरे शरीर को ढँकें. घर से बाहर काम करने की अनुमति वाली कुछ अफ़गान महिलाओं में से एक महिला स्वास्थ्य सेवा कर्मियों को सार्वजनिक रूप से बात करने से रोक दिया गया है, खासकर पुरुष रिश्तेदारों के साथ विशेष पालन करना होगा. 

पुरुष रिश्तेदारों के साथ भी बात करने की अनुमति नहीं 

हेरात में एक दाई ने अमू टीवी को बताया कि उन्हें काम पर जाते समय चेकपॉइंट पर बात करने या क्लीनिक में पुरुष रिश्तेदारों के साथ चिकित्सा मुद्दों पर चर्चा करने की भी अनुमति नहीं है. उन्होंने बताया कि वे हमें काम पर जाते समय चेकपॉइंट पर बात करने की भी अनुमति नहीं देते हैं और क्लीनिकों में हमें पुरुष रिश्तेदारों के साथ चिकित्सा मुद्दों पर चर्चा नहीं करने का निर्देश दिया जाता है.

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