गोली चलाने का आदेश देने वाला DSP बना Gen-Z प्रदर्शनकारियों के गुस्से का शिकार, पीट-पीटकर मार डाला

नेपाल की राजधानी काठमांडू मे Gen-Z प्रदर्शनकारियों ने उस DCP को पीट-पीटकर मार डाला, जिसने कथित तौर पर भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दिया था. इस फायरिंग में 19 लोगों की जान गई थी, जिसके बाद देशभर में तनाव और हिंसा भड़क उठी.

Date Updated Last Updated : 09 September 2025, 08:28 PM IST
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Nepal violent protests: नेपाल की राजधानी काठमांडू मे Gen-Z प्रदर्शनकारियों ने उस DCP को पीट-पीटकर मार डाला, जिसने कथित तौर पर भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दिया था. इस फायरिंग में 19 लोगों की जान गई थी, जिसके बाद देशभर में तनाव और हिंसा भड़क उठी.

हिंसक प्रदर्शनों ने मचाया कोहराम

नेपाल में पिछले दो दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शन ने हालात को युद्धक्षेत्र जैसा बना दिया है. काठमांडू, पोखरा, इटहरी, और अन्य शहरों में प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के निजी आवास पर हमला किया. आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं में अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 400 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं. पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस, वाटर कैनन, और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया, लेकिन स्थिति बेकाबू हो गई.

पूर्व पीएम की पत्नी की दुखद मृत्यु

काठमांडू के दल्लू इलाके में प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री झालानाथ खनल के घर में आग लगा दी. इस दौरान उनकी पत्नी, राज्यलक्ष्मी चित्रकार, घर में मौजूद थीं. आग से गंभीर रूप से झुलसने के बाद उन्हें कीर्तिपुर बर्न अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मृत्यु हो गई. परिवार के अनुसार, उनके फेफड़े और शरीर के कई हिस्से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके थे. इस घटना ने नेपाल के राजनीतिक संकट को और गहरा दिया है.

भारत ने बढ़ाई नेपाल दूतावास की सुरक्षा

नेपाल में बढ़ती अस्थिरता को देखते हुए भारत सरकार ने दिल्ली में बाराखंभा रोड स्थित नेपाल दूतावास की सुरक्षा कड़ी कर दी है. यह कदम नेपाल में हिंसक प्रदर्शनों और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच उठाया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके.

भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ युवाओं का गुस्सा

प्रदर्शनकारी केवल सोशल मीडिया बैन के खिलाफ नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, और सरकारी तानाशाही के खिलाफ भी आवाज उठा रहे हैं. युवाओं का कहना है कि सरकार की नीतियां उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबा रही हैं और भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश की जा रही है. इस आंदोलन ने नेपाल की राजनीति को हिलाकर रख दिया है.

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