'2025 में 8 बार हुई बात', भारत-US ट्रेड डील पर विदेश मंत्रालय का करारा पलटवार

भारत और अमेरिका के बीच थमे हुए व्यापारिक समझौते को लेकर चल रही जुबानी जंग अब एक नए मोड़ पर आ गई है.

Date Updated Last Updated : 09 January 2026, 07:55 PM IST
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नई दिल्लीः भारत और अमेरिका के बीच थमे हुए व्यापारिक समझौते को लेकर चल रही जुबानी जंग अब एक नए मोड़ पर आ गई है. अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक के उस दावे को भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि पीएम मोदी के एक फोन कॉल न करने की वजह से डील फेल हुईऋ विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को कड़े शब्दों में स्पष्ट किया कि यह दावा न केवल गलत है, बल्कि तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने जैसा है.

विदेश मंत्रालय का जवाब

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने लटनिक के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चर्चाओं का यह चित्रण सटीक नहीं है. जायसवाल ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने 2025 के दौरान 8 बार फोन पर बात की है. इन बातचीत में दोनों देशों की व्यापक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई.

समझौते के बेहद करीब थे

जायसवाल ने यह भी स्वीकार किया कि दोनों पक्ष कई मौकों पर समझौते के बेहद करीब पहुंचे थे. भारत अब भी एक संतुलित और आपसी फायदे वाले व्यापार समझौते को पूरा करने में रुचि रखता है, लेकिन यह समझौता दोनों देशों की 'पूरक अर्थव्यवस्थाओं' के हितों को ध्यान में रखकर ही होगा.

दबाव की राजनीति

बता दें कि हॉवर्ड लटनिक ने एक पॉडकास्ट में दावा किया था कि ट्रंप प्रशासन ने भारत को डील के लिए "तीन शुक्रवार" का समय दिया था. उन्होंने कहा कि सब कुछ तय था, बस मोदी को ट्रंप को कॉल करके इसे पक्का करना था, लेकिन नई दिल्ली इसमें असहज थी. लटनिक ने ट्रंप की रणनीति को सीढ़ी मॉडल बताया, जहां पहले आने वाले देशों को कम टैरिफ और बाद में आने वालों को ज्यादा रेट दिए जाते हैं.

सोची-समझी रणनीति

जानकारों का मानना है कि लटनिक की यह बयानबाजी भारत पर दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति है. अमेरिकी पक्ष लगातार भारत के कृषि और डेयरी सेक्टर को अपने उत्पादों के लिए खोलने की मांग कर रहा है, जिस पर भारत ने अपनी रेड लाइन बहुत पहले ही साफ़ कर दी है. फिलहाल भारत पर 50% जनरल टैरिफ और 25% रूसी तेल पेनल्टी पहले से ही लागू है.

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