ईरान की धमकी और अमेरिकी राष्ट्रपति की अचूक सुरक्षा, क्या ट्रंप को मारना संभव है?

ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के सलाहकार मोहम्मद-जवाद लारीजानी ने 8 जुलाई को एक विवादास्पद बयान दिया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को "धूप सेकते वक्त" मार सकता है. इस बयान ने तेहरान से वाशिंगटन तक सियासी हलचल मचा दी.

Date Updated Last Updated : 11 July 2025, 08:31 PM IST
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US President: ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के सलाहकार मोहम्मद-जवाद लारीजानी ने 8 जुलाई को एक विवादास्पद बयान दिया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को "धूप सेकते वक्त" मार सकता है. इस बयान ने तेहरान से वाशिंगटन तक सियासी हलचल मचा दी. लेकिन क्या वाकई ईरान ऐसी साजिश को अंजाम दे सकता है? आइए, इस सवाल का जवाब तलाशते हैं.

ट्रंप का मजेदार जवाब

डोनाल्ड ट्रंप ने इस धमकी का जवाब अपने अंदाज में दिया. व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने हंसते हुए कहा, "मैं धूप सेकता ही नहीं, तो ऐसी कोई संभावना ही नहीं है." ट्रंप ने आगे बताया कि बचपन में उन्होंने आखिरी बार धूप सेंकी थी, और अब उनकी व्यस्त जिंदगी में इसके लिए समय ही नहीं. उनके इस जवाब ने पत्रकारों को भी हंसी से लोटपोट कर दिया.

ईरानी स्लीपर सेल की साजिश

ट्रंप ने पहले भी दावा किया है कि अमेरिका में ईरानी स्लीपर सेल सक्रिय हैं, जो उनकी हत्या की साजिश रच रहे हैं. उनके मुताबिक, ये सेल बराक ओबामा और जो बाइडेन के कार्यकाल में सक्रिय हुए. ईरान ने कथित तौर पर ट्रंप की हत्या के लिए 200 मिलियन डॉलर का चंदा भी जुटाया है. लेकिन क्या यह साजिश कामयाब हो सकती है?

अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा

सीक्रेट सर्विस के 3,200 विशेष एजेंट, 1,300 वर्दीधारी अधिकारी और 2,000 से अधिक सहायक कर्मचारी इसकी जिम्मेदारी संभालते हैं. सीआईए और एफबीआई के खुफिया इनपुट्स के आधार पर व्हाइट हाउस को अभेद्य किला बनाया गया है, जहां एक सुरक्षित बंकर भी मौजूद है. राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान भी सीक्रेट सर्विस हर कदम पर सुरक्षा सुनिश्चित करती है.

ऐसे में ईरान या किसी अन्य देश के लिए इस सुरक्षा को भेदना लगभग असंभव है. ईरान की धमकियों के बावजूद, अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था इतनी सशक्त है कि कोई भी साजिश आसानी से नाकाम हो सकती है. ट्रंप का हल्का-फुल्का जवाब और सुरक्षा की मजबूती इस बात का सबूत है कि ऐसी धमकियां सिर्फ सियासी शोर बनकर रह जाती हैं.

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