पीरियड्स के दौरान महिलाओं को इन बातों का रखना चाहिए खास ध्यान, जानें एक्सपर्ट की राय

मासिक धर्म एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन आज भी कई महिलाएं इससे जुड़ी बातें खुलकर शेयर करने से झिझकती हैं. स्वच्छता की कमी न केवल असुविधा का कारण बनती है बल्कि मूत्र मार्ग में संक्रमण (UTI), प्रजनन मार्ग में संक्रमण (RTI) और त्वचा संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ाती है.

Date Updated Last Updated : 28 May 2025, 05:32 PM IST
फॉलो करें:

Period hygiene: मासिक धर्म एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन आज भी कई महिलाएं इससे जुड़ी बातें खुलकर शेयर करने से झिझकती हैं. स्वच्छता की कमी न केवल असुविधा का कारण बनती है बल्कि मूत्र मार्ग में संक्रमण (UTI), प्रजनन मार्ग में संक्रमण (RTI) और त्वचा संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ाती है.

प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मनन गुप्ता के अनुसार, खासकर ग्रामीण और कम आय वाले क्षेत्रों में कई लड़कियां साफ शौचालय और सैनिटरी पैड की कमी के कारण पीरियड्स के दौरान स्कूल छोड़ देती हैं. स्वच्छता की कमी से चकत्ते, खुजली, फंगल संक्रमण और गंभीर मामलों में गर्भाशय ग्रीवा के संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है.

स्वच्छता के लिए जरूरी टिप्स

पीरियड्स के दौरान स्वच्छता बनाए रखने के लिए सही प्रोडक्ट्स का उपयोग महत्वपूर्ण है. सैनिटरी पैड, टैम्पॉन या मेंस्ट्रुअल कप का चयन करें, जो आरामदायक और स्वच्छ हों. हर 4-6 घंटे में पैड बदलना अनिवार्य है, ताकि बैक्टीरिया के पनपने का खतरा कम हो. इस्तेमाल किए गए पैड को कागज में लपेटकर डस्टबिन में डालें. अगर पीरियड्स में तेज दर्द हो, तो डॉक्टर की सलाह पर पेनकिलर लें. व्यक्तिगत स्वच्छता के लिए नियमित रूप से गुनगुने पानी से प्राइवेट पार्ट्स की सफाई करें.

जागरूकता और शिक्षा की भूमिका

डॉ. के अनुसार, माताओं को अपनी बेटियों के पहले मासिक धर्म (मेनार्क) पर खुलकर बात करनी चाहिए. उन्हें स्वच्छता के तरीके, सही प्रोडक्ट्स का उपयोग और पीरियड्स से जुड़ी गलत धारणाओं को दूर करने की जानकारी देनी चाहिए. इससे न केवल स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम कम होगा, बल्कि लड़कियां आत्मविश्वास के साथ इस प्राकृतिक प्रक्रिया को स्वीकार करेंगी. स्कूलों और समुदायों में स्वच्छता सुविधाओं को बढ़ावा देना भी जरूरी है.

स्वस्थ भविष्य के लिए कदम

पीरियड्स के दौरान स्वच्छता न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है, बल्कि यह मानसिक आत्मविश्वास को भी बढ़ाता है. जागरूकता और सही संसाधनों के उपयोग से महिलाएं और लड़कियां स्वस्थ और सुरक्षित रह सकती हैं. समय पर डॉक्टरी सलाह और स्वच्छता की आदतें गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव में मददगार हैं. 

सम्बंधित खबर