खाने का स्वाद या सेहत का दुश्मन? भारत में बढ़ रहा 'साइलेंट सॉल्ट एपिडेमिक' का खतरा

नमक हमारी रसोई का अभिन्न हिस्सा है, जो हर व्यंजन को स्वादिष्ट बनाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही नमक, अगर अधिक मात्रा में लिया जाए, तो सेहत के लिए 'साइलेंट किलर' बन सकता है? आजकल लोग चिप्स, नमकीन, प्रोसेस्ड फूड और पैकेट वाले खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन कर रहे हैं, जिनमें छिपा नमक हमारी सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है.

Date Updated Last Updated : 15 July 2025, 08:47 PM IST
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Silent salt epidemic: नमक हमारी रसोई का अभिन्न हिस्सा है, जो हर व्यंजन को स्वादिष्ट बनाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही नमक, अगर अधिक मात्रा में लिया जाए, तो सेहत के लिए 'साइलेंट किलर' बन सकता है? आजकल लोग चिप्स, नमकीन, प्रोसेस्ड फूड और पैकेट वाले खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन कर रहे हैं, जिनमें छिपा नमक हमारी सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है.

ICMR-NIE (राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान) की चेतावनी के अनुसार, भारत में बढ़ता नमक का सेवन अब 'साइलेंट सॉल्ट एपिडेमिक' का रूप ले चुका है, जो कई जानलेवा बीमारियों को जन्म दे रहा है.

क्या है यह खतरा?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एक व्यक्ति को प्रतिदिन 5 ग्राम से कम नमक का सेवन करना चाहिए. लेकिन भारत में लोग औसतन 9.2 ग्राम नमक रोज खा रहे हैं, जो सामान्य से कहीं अधिक है. ग्रामीण इलाकों में भी यह मात्रा 5.6 ग्राम तक पहुंच रही है. इस अत्यधिक नमक के सेवन से हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और ब्रेन स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियां तेजी से फैल रही हैं. यह स्थिति भारत में एक चुपके से बढ़ते स्वास्थ्य संकट का संकेत दे रही है.

नमक से होने वाली बीमारियां

अधिक नमक का सेवन रक्तचाप को बढ़ाता है, जो हृदय रोगों और स्ट्रोक का प्रमुख कारण है. इसके अलावा, यह गुर्दे की समस्याओं और हड्डियों के कमजोर होने का खतरा भी बढ़ाता है. प्रोसेस्ड फूड्स में मौजूद अतिरिक्त सोडियम शरीर में सूजन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देता है.

बचाव के उपाय

वैज्ञानिकों का सुझाव है कि लो-सोडियम नमक का उपयोग करें, जिसमें सोडियम की मात्रा कम और पोटेशियम जैसे लाभकारी मिनरल्स अधिक हों. यह प्रोसेस्ड और पैकेट वाले खाद्य पदार्थों से परहेज करें और खाने में नमक की मात्रा को नियंत्रित करें.

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