उत्तराखंड में न्याय की जीत! अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में तीनों दोषियों को उम्रकैद

अंकिता भंडारी ऋषिकेश के यमकेश्वर में वनतंत्र रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थीं. पुलकित आर्य और उनके दो कर्मचारियों ने विवाद के बाद 2022 में ही उनकी हत्या कर दी थी. तीनों ने अंकिता को चिल्ला नहर में धकेल दिया.

Date Updated Last Updated : 30 May 2025, 04:51 PM IST
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Courtesy: Social Media

Ankita Bhandari Murder Case: उत्तराखंड के पौड़ी जिले की अदालत ने 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या के मामले में तीन लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. यह फैसला शुक्रवार को जज रीना नेगी ने सुनाया. दोषियों में रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता शामिल हैं.  

अंकिता भंडारी ऋषिकेश के यमकेश्वर में वनतंत्र रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थीं. पुलकित आर्य और उनके दो कर्मचारियों ने विवाद के बाद 2022 में ही उनकी हत्या कर दी थी. तीनों ने अंकिता को चिल्ला नहर में धकेल दिया. एक सप्ताह बाद उनका शव बरामद हुआ. इस घटना ने पूरे उत्तराखंड में गुस्सा भड़का दिया.  

पार्टी से पिता को निकाला

अंकिता के लापता होने की खबर ने लोगों को सड़कों पर उतरने को मजबूर किया. कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए. गुस्साए लोगों ने वनतंत्र रिसॉर्ट में आग लगा दी. इस घटना ने स्थानीय समुदाय को झकझोर कर रख दिया. पुलिस उप महानिरीक्षक पी. रेणुका देवी की अगुवाई में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मामले की जांच की. जांच में रिसॉर्ट के काले कारनामे सामने आए. पुलकित के पिता, पूर्व बीजेपी नेता विनोद आर्य को घटना के बाद पार्टी से निकाल दिया गया.  

तीन साल बाद मिला न्याय

कोटद्वार की अदालत में 30 जनवरी 2023 को मुकदमा शुरू हुआ. एसआईटी ने 500 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया. 47 गवाहों के बयान और साक्ष्यों से साबित हुआ कि अंकिता और पुलकित के बीच विवाद के बाद हत्या हुई. अदालत ने तीनों को हत्या, साक्ष्य नष्ट करने, आपराधिक साजिश और यौन उत्पीड़न के आरोप में दोषी ठहराया. अंकिता की मां सोनी देवी ने फैसले पर संतोष जताया, लेकिन मौत की सजा की मांग की. उन्होंने कहा कि मैं उत्तराखंड के लोगों से अपील करती हूं कि वे हमारा साथ दें. कोटद्वार कोर्ट आकर हमारा हौसला बढ़ाएं. परिवार ने न्याय के लिए लंबा इंतजार किया. लगभग तीन साल बाद आए इस फैसले ने अंकिता के परिवार को राहत दी. यह मामला समाज में महिलाओं की सुरक्षा और कार्यस्थल पर शोषण के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने वाला साबित हुआ. उत्तराखंड के लोगों ने इस फैसले को न्याय की जीत बताया.  

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