India-China relations: भारत-चीन संबंधों में सुधार, लोकसभा में बोले एस जयशंकर

India-China relations: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को लोकसभा में बताया कि पिछले कुछ दिनों में भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार हुआ है. उन्होंने कहा कि सैन्य और कूटनीतिक बातचीत के ज़रिए कई सीमा विवाद सुलझाए गए हैं. इसमें अक्टूबर में लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर पेट्रोलिंग समझौता भी शामिल है.

Date Updated Last Updated : 03 December 2024, 06:33 PM IST
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India-China relations: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को लोकसभा को जानकारी दी कि भारत और चीन के बीच संबंधों में हालिया दिनों में सुधार हुआ है. उन्होंने बताया कि सैन्य और कूटनीतिक वार्ता के माध्यम से कई सीमा विवाद सुलझाए गए हैं. इनमें वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गश्त समझौता भी शामिल है, जो अक्टूबर में हुआ था.

2020 के बाद संबंधों में असामान्यता

जयशंकर ने कहा कि 2020 से भारत-चीन संबंध असामान्य बने हुए हैं, क्योंकि चीनी कार्रवाइयों ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को प्रभावित किया. उन्होंने भारत के सैनिकों की प्रशंसा करते हुए कहा, "यह हमारे बलों का श्रेय है कि रसद चुनौतियों और कोविड-19 के बावजूद, उन्होंने चीनी सैनिकों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया."

तनाव कम करने पर जोर

जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत ने संबंधों को सुधार की ओर अग्रसर किया है. "आने वाले दिनों में, हम सीमा क्षेत्रों में गतिविधियों का प्रभावी प्रबंधन और तनाव को कम करने पर चर्चा करेंगे," उन्होंने कहा. जयशंकर ने यह भी बताया कि टकराव वाले क्षेत्रों से पीछे हटने का चरण पूरा हो चुका है, जिससे अब द्विपक्षीय संबंधों के अन्य पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा.

द्विपक्षीय वार्ता की प्रतिबद्धता

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत, सीमा विवाद के निष्पक्ष और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान के लिए चीन के साथ बातचीत करने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, हमने चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ विशेष प्रतिनिधियों और विदेश सचिव स्तर की बैठकों को शीघ्र बुलाने पर सहमति व्यक्त की है."

जयशंकर ने जोर देकर कहा कि सीमा क्षेत्रों के प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है. उन्होंने तीन प्रमुख सिद्धांतों को रेखांकित करते हुए कहा कि सभी परिस्थितियों में इन्हें बनाए रखना भारत के लिए अनिवार्य होगा.

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