भारत-तालिबान रिश्तों पर बौखलाया पाकिस्तान, इंडियन मेजर ने किया बड़ा खुलासा, बताया क्यों तालिबान खुद चाहता है भारत से नजदीकी

India Taliban relations: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बीच एक नया भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बन रहा है. तालिबान अब भारत के साथ रिश्ते बेहतर करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे पाकिस्तान में बेचैनी साफ दिखाई दे रही है.

Date Updated Last Updated : 22 October 2025, 12:35 PM IST
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India Taliban relations: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बीच एक नया भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बन रहा है. तालिबान अब भारत के साथ रिश्ते बेहतर करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे पाकिस्तान में बेचैनी साफ दिखाई दे रही है. पाकिस्तान के एक्सपर्ट्स और पूर्व सैन्य अधिकारियों ने भारत पर आरोप लगाया है कि वह अफगानिस्तान में तालिबान के ज़रिए अपनी पकड़ बढ़ाना चाहता है. लेकिन इस पूरे विवाद पर भारतीय सेना के रिटायर्ड मेजर जनरल राजन कोचर ने पाकिस्तान को करारा जवाब देते हुए उसके पुराने ‘राज’ खोल दिए.

पाकिस्तानी विश्लेषक कमर चीमा ने सवाल उठाया कि भारत कैसे ऐसे संगठन से रिश्ते सुधार सकता है, जिस पर यूएन सिक्योरिटी काउंसिल की रिपोर्टों में आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप हैं. इस पर मेजर जनरल राजन कोचर ने कहा कि पाकिस्तान को दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपना इतिहास देखना चाहिए.

“तालिबान को खड़ा किसने किया, पाकिस्तान भूल गया क्या?”

मेजर जनरल कोचर ने चीमा को जवाब देते हुए कहा, “जब रूस के खिलाफ अफगानिस्तान में जंग चल रही थी, तब पाकिस्तान ने ही अमेरिका की मदद से मुजाहिदीन को खड़ा किया. वही मुजाहिदीन आगे चलकर तालिबान बने. पूरे समय पाकिस्तान ने उन्हें फाइनेंशियल, मिलिट्री और इंटेलिजेंस सपोर्ट दिया. तब उन्हें ‘फ्रीडम फाइटर’ कहा जाता था, लेकिन आज वही तालिबान जब भारत के साथ बात करना चाहता है तो पाकिस्तान को तकलीफ हो रही है.”

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब तालिबान 2.0 सत्ता में आया था, तब पाकिस्तान के आईएसआई चीफ खुद काबुल पहुंचे थे और खुलेआम बयान दिया था कि अब पाकिस्तान को “स्ट्रेटेजिक डेप्थ” मिल गया है. उस समय पाकिस्तान को यह लगा था कि तालिबान उनकी कठपुतली बनकर भारत के खिलाफ काम करेगा, लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं.

भारत क्यों बदल रहा है अपना रुख?

मेजर जनरल कोचर ने कहा कि भारत की नीति हमेशा अफगानिस्तान की जनता के हित में रही है, न कि किसी विशेष शासन के पक्ष में. भारत ने तालिबान की सरकार के आने से पहले भी अफगानिस्तान में 13 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया था. वहां 400 से ज्यादा विकास परियोजनाएं सड़कों, अस्पतालों, स्कूलों और डैम्स के निर्माण के रूप में चल रही थीं, जो तालिबान शासन आने के बाद रुक गई थीं.

उन्होंने कहा, “तालिबान के साथ रिश्ते सुधारने की पहल भारत ने नहीं की, बल्कि तालिबान की तरफ से प्रस्ताव आया कि वे भारत के साथ बेहतर संबंध चाहते हैं. उन्होंने कहा कि वे अफगानिस्तान में डेवलपमेंट करना चाहते हैं, लोगों के जीवन स्तर को सुधारना चाहते हैं. जब उनकी तरफ से ये अनुरोध आया, तो भारत ने उसे स्वीकार कर लिया.”

“भारत का अफगानिस्तान में कोई सैन्य उद्देश्य नहीं”

मेजर जनरल राजन कोचर ने साफ कहा कि भारत का अफगानिस्तान में कोई मिलिट्री इंटेंट नहीं है. भारत का उद्देश्य वहां स्थिरता लाना और पुनर्निर्माण में मदद करना है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का यह सोचना गलत है कि भारत अफगानिस्तान के ज़रिए उसे घेरना चाहता है.

“भारत हमेशा से अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता का समर्थक रहा है. अगर तालिबान पाकिस्तान से लड़ता रहेगा, तो वहां स्थिरता नहीं आएगी और भारत के विकास कार्य भी नहीं चल पाएंगे. इसलिए यह भारत के हित में है कि अफगानिस्तान में शांति बनी रहे,” उन्होंने कहा.

चीन भी तालिबान के साथ बढ़ा रहा रिश्ते

मेजर जनरल कोचर ने पाकिस्तान से सवाल किया कि जब चीन जो उसका “सबसे करीबी दोस्त” है. तालिबान के साथ संबंध मजबूत कर रहा है, तो पाकिस्तान को उससे कोई दिक्कत क्यों नहीं है? उन्होंने बताया कि चीन की कई मेटलर्जी और माइनिंग कंपनियां अफगानिस्तान में पहले से काम कर रही हैं.

उन्होंने कहा, “चीन ने दो साल पहले ही अफगानिस्तान में निवेश शुरू कर दिया था. वो सीपेक (CPEC) को आगे बढ़ाने की कोशिश में है. तो फिर पाकिस्तान चीन को क्यों नहीं रोकता? क्योंकि पाकिस्तान जानता है कि चीन के आर्थिक हित वहां हैं. भारत के भी वहां विकास से जुड़े हित हैं, तो इसमें गलत क्या है?”

'तालिबान को मौका देना जरूरी'- मेजर जनरल कोचर

मेजर जनरल कोचर ने कहा कि तालिबान भले ही पहले एक आतंकी संगठन के रूप में जाना जाता था, लेकिन अब वह एक देश की सरकार चला रहा है. उन्होंने कहा कि समय के साथ देशों में परिवर्तन आता है. उदाहरण के लिए, अमेरिका भी सीरिया और अन्य देशों में उन्हीं ताकतों के साथ बातचीत करता है, जिन्हें कभी “टेरेरिस्ट” कहा जाता था.

उन्होंने कहा, “तालिबान को एक मौका देना चाहिए. अगर वे अफगानिस्तान की गवर्नेंस सुधारना चाहते हैं, वहां शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और हेल्थ सेक्टर को बेहतर करना चाहते हैं, तो भारत को उनकी मदद करनी चाहिए. इससे वहां स्थिरता आएगी, जो पूरे दक्षिण एशिया के लिए फायदेमंद है.”

वखान कॉरिडोर और चीन की सुरक्षा चिंता

राजन कोचर ने यह भी बताया कि अफगानिस्तान का वखान कॉरिडोर, जो सिर्फ 92 किलोमीटर लंबा है, चीन से जुड़ा हुआ है. चीन को इस इलाके में इस्लामिक रेडिकलाइजेशन और मिलिटेंसी का खतरा है, इसलिए वह तालिबान के साथ रिश्ते सुधारकर अपनी सीमाओं को सुरक्षित रखना चाहता है. उन्होंने कहा कि यही वजह है कि चीन भी पाकिस्तान को सलाह दे चुका है कि वह तालिबान से सीधी भिड़ंत न करे.

पाकिस्तान की दोहरी नीति पर सवाल

मेजर जनरल कोचर ने पाकिस्तान की “दोहरी नीति” पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने खुद ही गुड और बैड तालिबान की थ्योरी दी थी. जब तालिबान उनके हित में था, तब वह “अच्छा” था, और जब वही तालिबान पाकिस्तान की नीतियों के खिलाफ बोलने लगा, तो वह “बुरा” हो गया.

उन्होंने कहा, “यह पाकिस्तान की फॉरेन पॉलिसी की विफलता है कि उसने तालिबान को दशकों तक इस्तेमाल किया, और अब वही संगठन उसके खिलाफ खड़ा हो गया है. भारत इस लड़ाई का हिस्सा नहीं बनना चाहता. हमारा उद्देश्य सिर्फ अफगानिस्तान के विकास में सहयोग करना है.”

भारत की नीति साफ है अफगानिस्तान में स्थिरता और विकास. तालिबान से बातचीत का उद्देश्य न तो सैन्य गठजोड़ है और न ही राजनीतिक फायदा, बल्कि यह एक मानवीय और रणनीतिक संतुलन की नीति है. वहीं, पाकिस्तान अपने ही बनाए जाल में फंसा दिखाई दे रहा है. जिस तालिबान को उसने खड़ा किया, वही अब उसके लिए चुनौती बन चुका है.

मेजर जनरल राजन कोचर के शब्दों में, “भारत अफगानिस्तान की जनता के साथ है, न कि किसी शासन के साथ. तालिबान को मौका देना चाहिए ताकि वहां के लोग एक बेहतर जीवन जी सकें यही भारत की असली नीति है.”

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