4 घंटे हवा में मौत का डर! फ्लाई91 की फ्लाइट में तकनीकी खराबी, बाल-बाल बचे यात्री

अचानक तकनीकी खराबी के कारण फ्लाई91 की उड़ान का नियंत्रण खो गया जिसके बाद यात्री काफी डर गए थे. हालांकि बाद में एक बड़ी विमान दुर्घटना बाल-बाल टल गई, जिससे यात्री लगभग चार घंटे तक हवा में दहशत में रहे.

Date Updated Last Updated : 20 April 2026, 11:53 AM IST
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Courtesy: Pinterest

बेंगलुरु: पिछले दिनों हो रहे लगातार होदसों के बीच एक बड़ा हादसा टल गया. अचानक तकनीकी खराबी के कारण फ्लाई91 की उड़ान का नियंत्रण खो गया जिसके बाद यात्री काफी डर गए थे. हालांकि बाद में एक बड़ी विमान दुर्घटना बाल-बाल टल गई, जिससे यात्री लगभग चार घंटे तक हवा में दहशत में रहे.

फ्लाई91 एयरलाइंस की फ्लाइट IC3401 (ATR टर्बोप्रॉप AT7), जोकि कल दोपहर लगभग 3 बजे हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से रवाना हुई थी और इसे शाम 4:30 बजे हुबली में उतरना था. हालांकि, जैसे ही विमान हुबली के पास पहुंचा, उसमें कथित तौर पर तकनीकी खराबी आ गई, जिसके कारण पायलटों को लैंडिंग रद्द करनी पड़ी.

हवा में चार घंटे तक रहा विमान

इस तकनीकी खराबी के कारण विमान लगभग चार घंटे तक हवा में ही रहा और मुंडगोड, दावणगेरे और शिवमोग्गा सहित क्षेत्रों के ऊपर चक्कर लगाता रहा, क्योंकि स्थिति को संभालने और सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे थे. 

आखिरकार सुरक्षित लैंडिंग

काफी कोशिशों और सावधानी के बाद विमान को हुबली की बजाय बेंगलुरु डायवर्ट किया गया. अंततः शाम करीब 7:30 बजे इसे केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर सुरक्षित उतार लिया गया. इस तरह एक संभावित बड़ा हादसा टल गया.

यात्रियों में डर और घबराहट का माहौल

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान विमान में सवार लोग बेहद घबराए हुए थे. कई यात्री प्रार्थना करते नजर आए, जबकि कुछ लोग डर के कारण रोने लगे थे. सबकी आंखों के सामने पिछले साल हुए अहमदाबाद विवन हादसे का मंजर आ रहा था. लेकिन लंबे समय तक अनिश्चितता की स्थिति ने सभी को मानसिक रूप से परेशान कर दिया था.

परिवारों का गुस्सा

वहीं, यात्रियों के परिजनों ने एयरलाइन के प्रति नाराजगी जताई. उनका आरोप है कि पूरे घटनाक्रम के दौरान उन्हें सही जानकारी नहीं दी गई, जिससे चिंता और बढ़ गई. उन्होंने कॉम्युनिकेशन में कमी और लापरवाही पर सवाल उठाए.

जांच और सुरक्षा पर उठाए सवाल

इस घटना के बाद विमानन सुरक्षा और तकनीकी जांच को लेकर सवाल उठने लगे हैं. हालांकि, समय रहते पायलटों की सूझबूझ से बड़ा हादसा टल गया, लेकिन इस तरह की घटनाएं सुरक्षा मानकों पर गंभीर ध्यान देने की जरूरत को भी उजागर करती हैं.

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