ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल किए गए हथियारों की भारी मांग! सऊदी से लेकर इंडोनेशिया तक हर कोई इसका दीवाना

ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद भारत के स्वदेशी हथियारों की मांग बढ़ गई है. स्वदेशी गाइडेड पिनाका रॉकेट सिस्टम ने वैश्विक रक्षा बाजार में अपना दबदबा कायम कर लिया है.

Date Updated Last Updated : 07 July 2025, 01:29 PM IST
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Pinaka Rocket System: ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद भारत के स्वदेशी हथियारों की मांग बढ़ गई है. स्वदेशी गाइडेड पिनाका रॉकेट सिस्टम ने वैश्विक रक्षा बाजार में अपना दबदबा कायम कर लिया है. इस अत्याधुनिक हथियार प्रणाली की मांग सऊदी अरब, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों में तेजी से बढ़ रही है, जो भारत की रक्षा तकनीक की विश्वसनीयता और ताकत का प्रमाण है.

 पिनाका की विदेशों में मांग

ऑपरेशन सिंदूर में पिनाका रॉकेट सिस्टम की प्रभावशाली भूमिका ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया. सोलर इंडस्ट्रीज के कार्यकारी निदेशक (सेवानिवृत्त) मेजर जनरल वी. इससे पहले आर्मीनिया ने पिनाका का उपयोग अजरबैजान के खिलाफ किया, जिसने इसकी सटीकता और मारक क्षमता को सिद्ध किया. यह भारत की 'मेक इन इंडिया' पहल की सफलता का प्रतीक है, जो देश को रक्षा निर्यात के क्षेत्र में अग्रणी बना रहा है.

पिनाका की अनूठी विशेषताएं

पिनाका एक मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (MBRL) है, जो 44 सेकंड में 12 रॉकेट दागने की क्षमता रखता है. इसकी गाइडेड प्रणाली सैटेलाइट नेविगेशन के साथ 75 किलोमीटर से अधिक दूरी तक सटीक हमले कर सकती है. एक बैटरी कुछ ही सेकंड में 1 टन विस्फोटक दुश्मन क्षेत्र में पहुंचा सकती है, जो इसे युद्ध में अत्यंत घातक बनाता है.

भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता

पिनाका का गाइडेड वर्जन अमेरिकी HIMARS सिस्टम की तुलना में कहीं अधिक किफायती है. एक गाइडेड रॉकेट की कीमत लगभग 56,000 डॉलर (करीब 47 लाख रुपये) है, जबकि एक पूरी यूनिट की लागत 140-150 करोड़ रुपये और एक रेजीमेंट की लागत 850 करोड़ रुपये है.

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और सोलर इंडस्ट्रीज द्वारा विकसित पिनाका, भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति का एक शानदार उदाहरण है. यह सिस्टम न केवल भारतीय सेना को सशक्त बना रहा है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की रक्षा तकनीक को स्थापित कर रहा है.

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