18 मई से मानसून की एंट्री? केरल-तमिलनाडु में जल्दी बारिश, भीषण गर्मी को मिलेगी राहत

IMD के मुताबिक आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ सकती है, लेकिन दूसरी ओर मध्यम-श्रेणी मौसम पूर्वानुमानों के लिए यूरोपीय केंद्र के नए अनुमान संकेत दे रहे हैं कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से पहले दस्तक दे सकता है.

Date Updated Last Updated : 25 April 2026, 10:49 AM IST
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Courtesy: AI (Grok)

नई दिल्ली: जैसे-जैसे अप्रैल अपने आखिरी दिनों की ओर बढ़ रहा है वैसे-वैसे देश में गर्मी बढ़ रही है. अप्रैल के आखिरी दिनों में देश के कई हिस्से भीषण गर्मी की चपेट में हैं, जहां तापमान 43-44 डिग्री तक पहुंच चुका है. ऐसे हालात में हर किसी को बारिश का ही इंतजार है. इसी बीच मौसम से जुड़ी एक राहत भरी खबर सामने आई है, जो लोगों को गर्मी से जल्द राहत मिलने की उम्मीद जगा रही है.

IMD के मुताबिक आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ सकती है, लेकिन दूसरी ओर मध्यम-श्रेणी मौसम पूर्वानुमानों के लिए यूरोपीय केंद्र के नए अनुमान संकेत दे रहे हैं कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से पहले दस्तक दे सकता है. इससे मई के अंत तक दक्षिण भारत में अच्छी बारिश होने की संभावना है. 

मानसून की संभावित शुरुआत

मौसम पूर्वानुमानों के अनुसार, मानसून सबसे पहले अंडमान व नोकोबार द्वीप समूह में 18 से 25 मई के बीच पहुंच सकता है. इसके बाद धीरे-धीरे यह पूरे भारत के अन्य हिस्सों की ओर बढ़ेगा.

तेज हवाएं और बारिश के संकेत

दक्षिण बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में तेज दक्षिण-पश्चिमी हवाओं के चलने की संभावना है. ये हवाएं नमी लेकर आएंगी, जिससे द्वीपों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है. कुछ क्षेत्रों में औसत से 30 से 60 मिमी ज्यादा बारिश होने की संभावना है.

मानसून को बढ़ावा देने वाले कारक

विशेषज्ञों के अनुसार, अंडमान के आसपास उष्णकटिबंधीय प्रणाली बनने की संभावना भी है, जो मानसून को गति देने में मदद कर सकती है. ये सिस्टम समुद्र से अधिक नमी खींचकर बारिश की प्रक्रिया को तेज करते हैं.

केरल-तमिलनाडु में जल्दी बारिश

25 मई से 1 जून के बीच मानसून के केरल और तमिल नाडू के दक्षिणी हिस्सों तक पहुंचने के आसार हैं. यहां सामान्य से ज्यादा बारिश होने की संभावना जताई गई है, जिससे गर्मी से राहत मिलेगी और खेती की शुरुआत समय पर हो सकेगी.

मानसून को प्रभावित करने वाले तत्व

मानसून के आगमन पर इंडियन ओशन डाइपोल जैसे कारकों का असर पड़ता है. अगर यह अनुकूल स्थिति में रहता है, तो मानसून मजबूत होता है. इसके अलावा, समुद्र और वातावरण में तापमान का संतुलन भी अहम भूमिका निभाता है.

गर्मी का भी बड़ा असर

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस साल की तेज गर्मी भी मानसून को जल्दी आने में मदद कर सकती है. अधिक तापमान से समुद्री हवाएं तेजी से सक्रिय होती हैं, जिससे बारिश जल्दी शुरू हो सकती है.

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