कानपुर जिला जेल में पहुंचा गंगाजल, महाकुंभ के मौके पर कैदी ने किया संगम के पवित्र जल से स्नान

महाकुंभ के पावन अवसर पर आज कानपुर जिला कारागार में एक अनूठा आयोजन देखने को मिला. जेल में बंद कैदियों ने संगम से लाए गए पवित्र गंगाजल से विधिवत स्नान किया. यह पहल कारागार मंत्री के विशेष निर्देश पर की गई, जिसके तहत गंगाजल को मंगवाकर जेल परिसर में पूजा-अर्चना के साथ स्नान कुंड में मिलाया गया.

Date Updated Last Updated : 21 February 2025, 04:44 PM IST
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Maha Kumbh 2025: महाकुंभ के पावन अवसर पर आज कानपुर जिला कारागार में एक अनूठा आयोजन देखने को मिला. जेल में बंद कैदियों ने संगम से लाए गए पवित्र गंगाजल से विधिवत स्नान किया. यह पहल कारागार मंत्री के विशेष निर्देश पर की गई, जिसके तहत गंगाजल को मंगवाकर जेल परिसर में पूजा-अर्चना के साथ स्नान कुंड में मिलाया गया.

इस दौरान बंदियों ने "हर-हर गंगे" के जयकारों के साथ गंगा माता के प्रति अपनी श्रद्धा और आस्था व्यक्त की. यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि बंदियों के मनोबल को बढ़ाने में भी कारगर साबित हुआ.

Maha Kumbh 2025
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गंगाजल स्नान का आयोजन 

कारागार प्रशासन ने इस विशेष आयोजन के लिए पहले से तैयारियां शुरू कर दी थीं. संगम से गंगाजल को विशेष रूप से मंगवाया गया और इसे पूरे विधि-विधान के साथ स्नान कुंड में डाला गया. जेल में मौजूद बंदियों को इस पवित्र जल से स्नान करने का अवसर दिया गया. यह पहल महाकुंभ के महत्व को ध्यान में रखते हुए की गई, जो हिंदू धर्म में आस्था और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है. इस आयोजन ने जेल के माहौल को भी कुछ पल के लिए आध्यात्मिक रंग में रंग दिया.

बंदियों ने जताया आभार

स्नान के बाद जेल में बंद कैदियों ने इस अनूठी पहल के लिए सरकार और जेल प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया. उनके अनुसार, इस तरह का आयोजन उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ-साथ आध्यात्मिक शांति भी प्रदान करता है. "हर-हर गंगे" के उद्घोष के बीच हुए इस स्नान ने बंदियों को अपने भीतर एक नई ऊर्जा का संचार महसूस कराया.

Maha Kumbh 2025
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महाकुंभ की महत्ता 

महाकुंभ का यह अवसर देश भर में धूमधाम से मनाया जा रहा है, और कानपुर जेल का यह आयोजन उसकी एक छोटी झलक मात्र है. जेल प्रशासन की यह पहल न केवल बंदियों के लिए सम्मान का विषय है, बल्कि समाज में सुधार और पुनर्जनन की भावना को भी दर्शाती है. इस तरह के कदम भविष्य में भी बंदियों के जीवन को बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं.

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