बंधक को रिहा करने तक फलस्तीनियों को गाजा लौटने नहीं देंगे : इजराइल

इजराइल ने हाल ही में एक कड़ा बयान दिया है, जिसमें उसने कहा है कि जब तक वह अपने बंधकों को रिहा नहीं करवा लेता, तब तक फलस्तीनियों को गाजा क्षेत्र में लौटने की अनुमति नहीं दी जाएगी. यह बयान इस्लामिक प्रतिरोध समूह हमास द्वारा इजराइल के नागरिकों को बंधक बनाने के बाद आया है.

Date Updated Last Updated : 25 January 2025, 05:30 PM IST
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Courtesy: social media

Israel : इजराइल ने हाल ही में एक कड़ा बयान दिया है, जिसमें उसने कहा है कि जब तक वह अपने बंधकों को रिहा नहीं करवा लेता, तब तक फलस्तीनियों को गाजा क्षेत्र में लौटने की अनुमति नहीं दी जाएगी. यह बयान इस्लामिक प्रतिरोध समूह हमास द्वारा इजराइल के नागरिकों को बंधक बनाने के बाद आया है. इजराइल सरकार ने इस बात को स्पष्ट किया कि गाजा से बंधकों को सुरक्षित रूप से लौटाने की प्राथमिकता होगी और इसके बिना गाजा क्षेत्र में कोई गतिविधि नहीं होने दी जाएगी.

बंधक संकट और इजराइल की प्रतिक्रिया

इस बयान के बाद इजराइल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समर्थन की अपील की है और कहा है कि वह सभी बंधकों को सुरक्षित तरीके से घर वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास करेगा. इजराइल के अधिकारियों के अनुसार, हमास द्वारा बंधक बनाए गए नागरिकों की संख्या काफी अधिक है, और उनका उद्देश्य इन बंधकों की रिहाई तक किसी भी स्थिति को सामान्य नहीं होने देना है. इजराइल ने यह भी कहा है कि बंधकों की सुरक्षित रिहाई के बाद ही गाजा के लिए किसी प्रकार की मानवीय मदद की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है.

गाजा का संघर्ष और वैश्विक प्रतिक्रियाएं

गाजा के मुद्दे पर यह बयान एक नई जटिल स्थिति को जन्म देता है, जिसमें न केवल इजराइल और फलस्तीन के बीच संघर्ष बढ़ सकता है, बल्कि वैश्विक समुदाय के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है. संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन पहले ही इस स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त कर चुके हैं. ऐसे में, इजराइल के इस निर्णय को लेकर विभिन्न देशों की प्रतिक्रिया मिलनी शुरू हो गई है, और यह देखा जा रहा है कि क्या वैश्विक दबाव इजराइल के फैसले को प्रभावित करता है.

इजराइल का यह कड़ा बयान साफ तौर पर यह दर्शाता है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा को सबसे पहले प्राथमिकता दे रहा है. इस बीच, हमास और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण गाजा में मानवीय संकट की स्थिति भी गंभीर हो सकती है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों पक्षों के बीच क्या बातचीत और समाधान निकलता है, और क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस संकट को हल करने में कोई भूमिका निभा पाता है.
 

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