असुरक्षित शारीरिक संबंध से फैलने वाली खतरनाक बीमारिया, जानें और सावधान रहें

असुरक्षित शारीरिक संबंध न केवल HIV का कारण बन सकते हैं, बल्कि कई अन्य गंभीर यौन संचारित रोग (STIs) भी फैला सकते हैं. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कंडोम का इस्तेमाल न करने से कई जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. आइए जानते हैं ऐसी ही प्रमुख बीमारियों के बारे में, जिनकी रोकथाम के लिए जागरूकता और सावधानी ज़रूरी है.

Date Updated Last Updated : 13 July 2025, 08:27 PM IST
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Unprotected sex: असुरक्षित शारीरिक संबंध न केवल HIV का कारण बन सकते हैं, बल्कि कई अन्य गंभीर यौन संचारित रोग (STIs) भी फैला सकते हैं. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कंडोम का इस्तेमाल न करने से कई जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. आइए जानते हैं ऐसी ही प्रमुख बीमारियों के बारे में, जिनकी रोकथाम के लिए जागरूकता और सावधानी ज़रूरी है.

HIV और एड्स: सबसे घातक यौन रोग

HIV (ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस) यौन संचारित रोगों में सबसे खतरनाक माना जाता है. यदि इसका समय पर इलाज न हो, तो यह एड्स (एक्वायर्ड इम्यूनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम) का रूप ले सकता है. दिल्ली के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. सूर्यकांत शर्मा के अनुसार, HIV का जोखिम कई पार्टनर्स और असुरक्षित संबंधों से बढ़ता है. नियमित जांच और प्री-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PrEP) इस खतरे को कम कर सकते हैं.

गोनोरिया: बढ़ता हुआ खतरा

गोनोरिया, जो नीसेरिया गोनोरिया बैक्टीरिया से होता है, असुरक्षित शारीरिक संबंधों से फैलता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत, खासकर शहरी क्षेत्रों में, गोनोरिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. यह बीमारी प्रजनन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे बांझपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

क्लैमाइडिया: साइलेंट इंफेक्शन

क्लैमाइडिया, जो क्लैमाइडिया ट्रैकोमैटिस बैक्टीरिया से होता है, एक ऐसा यौन रोग है जो बिना लक्षणों के भी फैल सकता है. लैंसेट इंफेक्शियस डिजीज (2023) की स्टडी के अनुसार, भारत में 20-30% युवा जो असुरक्षित संबंध बनाते हैं, उनमें क्लैमाइडिया का जोखिम है. यह प्रजनन संबंधी समस्याओं और बांझपन का कारण बन सकता है.

ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी): कैंसर का जोखिम

एचपीवी एक वायरल इंफेक्शन है, जो सर्वाइकल कैंसर, एनल कैंसर और जेनिटल वार्ट्स का कारण बन सकता है. इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च (2024) के अनुसार, भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है. कंडोम का उपयोग एचपीवी के जोखिम को 70% तक कम कर सकता है.

जेनिटल हर्पीस: स्किन कॉन्टैक्ट से खतरा

जेनिटल हर्पीस, जो हर्पीस सिम्प्लेक्स वायरस (एचएसवी) से होता है, स्किन कॉन्टैक्ट के जरिए फैलता है. WHO की 2024 रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 10-15% यौन सक्रिय लोगों में एचएसवी-2 का खतरा है. कंडोम इसका जोखिम 50-60% तक कम कर सकता है.

सिफलिस और हेपेटाइटिस: जानलेवा इंफेक्शन

ट्रेपोनेमा पैलिडम बैक्टीरिया से होने वाला सिफलिस हृदय, मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुँचा सकता है. असुरक्षित यौन संबंध और रक्त के माध्यम से फैलने वाले हेपेटाइटिस बी और सी, यकृत कैंसर और सिरोसिस का कारण बन सकते हैं. हेपेटाइटिस बी के लिए टीका उपलब्ध है, लेकिन हेपेटाइटिस सी से बचाव का एकमात्र उपाय सावधानी बरतना है.

असुरक्षित यौन संबंध से बचने और कंडोम का उपयोग करने से इन बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है. नियमित स्वास्थ्य जाँच और जागरूकता सुरक्षित जीवन की कुंजी हैं.

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